महाभारत में शकुनि के पास पासे थे। हमारे समय ने उसकी चौसर को बहुत बड़ा कर दिया है। अब पासे हाथीदाँत के नहीं होते। वे कभी एक मुस्कान में छिपे होते हैं, कभी ठहरी हुई निगाह में, कभी किसी की चोट पर बोले गए उस वाक्य में, “अरे, अभी तो…
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कवयित्रि: एक माँ एक कुम्हार – अंकिता साहिबा
बहुत सारे लोग पूछते हैं – कैसा चल रहा है आपका पोस्टपार्टमऔर मदरहुड का सफ़र?शिक़ायतें तो बहुत हैं, मगर ज़िंदगी से कोई शिक़ायत नहीं।क्योंकि इस बार हमने कुम्हार का क़िरदार निभाया है।एक नन्हे से जीवन को आकार दिया है,उसे गढ़ा है, सँवारा है और अब उसे बेहतर बनाने में व्यस्त…
Read More →कविता: मीरांगिणी – प्रदीप अग्रवाल
ए मेरी मीरांगिणीइतना भी न कर प्रेम मुझसेकि मेरे मौन को फिर सेस्वर लेना पड़ जाए। ए मेरी मीरांगिणीइतना भी न कर प्रेम मुझसेकि फिर से मुझेअवतार लेना पड़ जाए। अंतरा १ (कृष्ण) मैं जो सर्वत्र हूँ, अनाम हूँतेरी एक दृष्टि में ठहरता हूँ।तेरी भक्ति के तप मेंनिराकार होकर भीछाया…
Read More →कविता: घर आँगन – निधि गुप्ता
बचपन से किताबों में डूबी रहीकि मेरी अपनी किताब ही कहीं खो गईलिख-लिखकर मिटाती रहीजाने किससे मैं अपनी प्रतिभा छुपाती रही। छोड़ दिया जिस चौखट को लड़कपन मेंबहुत कुछ रह गया मेरा माँ के उस आँगन में। आज भी जब कलम मिल जाती हैतो चेहरे पर कलियाँ खिल जाती हैंकलम की…
Read More →कविता: थोड़ा पास आओ तो बात बन जाए – विवेक मिश्रा
थोड़ा पास आओ तो बात बन जाएथोड़ा मुस्करायो तो बात बन जाएरिश्तों में कड़वाहट अच्छी नहीं होतीथोड़ा मिठास ले आओ तो बात बन जाए। जिंदगी सिखाती है जीने के सब सबकतुम भी समझ जाओ तो बात बन जाएदोस्तों की भीड़ लगाने से कुछ नहीं होताकोई एक दोस्त बनाओ तो बात…
Read More →“गाएगा युग” : पुस्तक समीक्षा – डॉ. नैब सिंह मंडेर
गाएगा युग – हाइकु संग्रह – कश्मीरी लाल चावला हाइकु जापान की विश्वप्रसिद्ध काव्य विधा है, जिसमें 5–7–5 वर्णों की तीन पंक्तियों में कुल 17 वर्ण होते हैं। यह विश्व की सबसे छोटी लेकिन सबसे प्रभावशाली विधा है, जो जीवन के गहरे अनुभवों को संक्षेप में प्रकट करती है। आज…
Read More →कैंची धाम की अलौकिक यात्रा: रितेश निगम
मेरी ट्रेन डेढ़ घंटा लेट थी, सुबह साढ़े पांच के बजाए करीब सवा सात बजे मुरादाबाद पहुंची। हालांकि, चंडीगढ़ से निकली सही समय थी। ट्रेन मुरादाबाद के एक नंबर प्लेटफार्म पर करीब 7.10 पहुंची, डेढ़ घंटा लेट। स्टेशन से ऑटो किया और बायपास पहुंचा। 7 बजे की बस की टिकट…
Read More →अहंकारी नव कोंपलें
नई कोपले वृक्षों को आँख दिखाने लगीअ॑ह के जर्रे आंधियों से टकराने लगी जिनकी मेरुदंड अभी सीधी भी न होने पाईवो अंकुर अब बरगद को गिराने लगी है पोषित जो स्वयं शाखाओं के सहारेनव पल्लव अब टहनियों पर शासन चलाने लगी स्वयं का वजूद भी बना ना पाया जो कनखावो…
Read More →सात दिन, सात रंग – हिन्दी की ज्योति के संग: गुरुकुल यूके
लंदन। ब्रिटेन में हिंदी की अग्रणी संस्था “गुरुकुल यूके” ने शानदार कार्यक्रमों के विभिन्न सत्रों के साथ हिंदी पखवाड़े को मनाया। कार्यक्रम के कुछ सत्र ऑनलाइन हुए तो बहुत से अलग-अलग स्थलों में भी – ऐसा ही एक शानदार आयोजन लन्दन स्थित चेम्सफोर्ड में आयोजित हुआ। ये कार्यक्रम 19 से…
Read More →Labour Conference Speech: The Case for Democratic Reform
A Moment for Renewal: Reflections on Andy Burnham’s Labour Conference Speech and the Case for Democratic Reform Andy Burnham’s speech to the Labour Party Conference in Liverpool was significant not simply because it was his first major conference address as Prime Minister, but because it attempted to confront some of…
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