1. तुम्हारी यादें इनकी ज़ेबों में हरदम कंगाली है भिखमंगों की यार कहाँ दीवाली है। जागी आँखों से मैंने सपना देखा हर इक चेहरे पर छाई खुशहाली है किस पर अब विश्वास करें इस दुनिया में हर डाली को काट रहा ख़ुद माली है। जनता को बहकाता झूठे वादों से…
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कविता : रीज़ को पहुँचा आई – कमलजीत कौर
रीज़ को पहुँचा कर आ गईसपनों की देहरी तकजहाँ अब वह स्वयं करेगी चुनावअपने अनुभवों को देगी आकारअपने विचारों को देगी नया विस्तार। कितने अनजाने लोगों सेअब उसका होगा परिचयकितनी नई बातें होंगीकितने नए अनुभवों का संचय। छोटी-सी गुड़िया मेरीआज से अकेली रहेगीअब किसको देगीअपनी जादू-सी झप्पी? बार-बार यही विचारमन…
Read More →कविता: मीरांगिणी – प्रदीप अग्रवाल
ए मेरी मीरांगिणीइतना भी न कर प्रेम मुझसेकि मेरे मौन को फिर सेस्वर लेना पड़ जाए। ए मेरी मीरांगिणीइतना भी न कर प्रेम मुझसेकि फिर से मुझेअवतार लेना पड़ जाए। अंतरा १ (कृष्ण) मैं जो सर्वत्र हूँ, अनाम हूँतेरी एक दृष्टि में ठहरता हूँ।तेरी भक्ति के तप मेंनिराकार होकर भीछाया…
Read More →कविता: घर आँगन – निधि गुप्ता
बचपन से किताबों में डूबी रहीकि मेरी अपनी किताब ही कहीं खो गईलिख-लिखकर मिटाती रहीजाने किससे मैं अपनी प्रतिभा छुपाती रही। छोड़ दिया जिस चौखट को लड़कपन मेंबहुत कुछ रह गया मेरा माँ के उस आँगन में। आज भी जब कलम मिल जाती हैतो चेहरे पर कलियाँ खिल जाती हैंकलम की…
Read More →अनकहे ख्वाबों के पन्ने
आज पिया मुझसे रूठ गएअचानक ही अजीब अनोखी सी बातें करने लगे,कहने लगे कि.. पूरा पढ़ें
Read More →यादें……
प्रेम की भी पोषक हैं यादेंकभी बरसती भरी दुपहरीकभी टपकती हैं शामों मेंउछल कूद करतीं हृदय मेंकभी निलय से आलिंदो में……. पूरा पढ़ें
Read More →मातृभूमि से दूर बसने की व्यथा
जन्मभूमि माँ !तू वहां मैं यहाँ।तुझ से दूर इस विदेश में बस करजीती हूँ हर पल तेरा ही नाम लेकरबरसों बीत गये बिछड़े गोद से तेरीफिर भी लगता है तू हरदम है पास मेरीक्या इसी को कहते हैं जन्म-जन्म का नाता पूरा पढ़ें
Read More →वेदना के तिमिर को तिरोहित करें
नेह का मंत्र लिख श्वाँस के दीप पर, वर्तिका सम हृदय को पुरोहित करें ।काव्य की सर्जना का दिवाकर उगा,वेदना के तिमिर को तिरोहित करें ।। पूरा पढ़ें
Read More →जिस देह में बसते देश कई…
नीली कश्मीरी आँखों नेआज़ाद सा ख़्वाब सजाया था,जब वीर मराठों ने माथेकेसरिया तिलक लगाया था। पूरा पढ़ें
Read More →तूं दिखादे तेरा भारत है नाम
तोड़ दुश्मन के सपने तमाम तूं दिखादे तेरा भारत है नाम कोई लेकर के भगवे की आड़ किसे का नाम पुछ पिसे जाड़ उसकी अक्ल मैं तूं दिए बाड़ एक है गुरु अल्लाह और राम तूं दिखादे… पूरा पढ़ें
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