पुस्तक समीक्षा: क्लाइडोस्कोप: सतरंगी स्मृतियां : ख़ुदेजा ख़ान

khudeja khan

ज़िन्दगी के साथ क़दमताल करते यादों के कारवां  हर किसी के जीवन के अपने क्लाइडोस्कोप होते हैं लगातार रंग बदलते, आकृति ग्रहण करते, नये दृश्य गढ़ते हुए। इन रंगों, आकृतियों और दृश्यों में कितना कुछ घटित होता रहता है, निर्मित होता है,परिवर्तित होता है इसका लेखा-जोखा जब लिखा जाता है…

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व्यंग्य: जले पर नमक – विवेक रंजन श्रीवास्तव

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महाभारत में शकुनि के पास पासे थे। हमारे समय ने उसकी चौसर को बहुत बड़ा कर दिया है। अब पासे हाथीदाँत के नहीं होते। वे कभी एक मुस्कान में छिपे होते हैं, कभी ठहरी हुई निगाह में, कभी किसी की चोट पर बोले गए उस वाक्य में, “अरे, अभी तो…

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सात दिन, सात रंग – हिन्दी की ज्योति के संग: गुरुकुल यूके

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लंदन। ब्रिटेन में हिंदी की अग्रणी संस्था “गुरुकुल यूके” ने शानदार कार्यक्रमों के विभिन्न सत्रों के साथ हिंदी पखवाड़े को मनाया। कार्यक्रम के कुछ सत्र ऑनलाइन हुए तो बहुत से अलग-अलग स्थलों में भी – ऐसा ही एक शानदार आयोजन लन्दन स्थित चेम्सफोर्ड में आयोजित हुआ। ये कार्यक्रम 19 से…

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यूनाइटेड किंगडम में प्रेरणा का संगम- “संगम यू.के.”

भारतीय संस्कृति, हिंदी और सामाजिक एकता का सशक्त मंच भाषा के संरक्षण और संवर्धन को नई ऊर्जा देने तथा समाज सेवा की भावना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्थापित संगम यू.के. आज ब्रिटेन के अग्रणी भजोड़ने का निरंतर कार्य कर रहा है। संगम का मूल विश्वास है कि भारतीय…

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