कविता: “पाँव” – डॉ नंदिता साहू

nandita sahu, hidni, namastey bharat

भीड़ से भरे रास्ते पर चलते है  कई जोड़ी पाँव कोई रफ़्तार से भागता हुआ ज़िन्दगी की राह को नापता हुआ। कोई नपे तुले अंदाज़ में सफ़र काटता हुआ। किसी के संग एक जोड़ी पाँव और है सफ़र ख़त्म ना हो, इस आस में टहलता हुआ। एक जोड़ी पाँव ऐसा…

Read More →