माँ सरस्वती

माँ सरस्वती हिन्दू धर्म में विद्या, ज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि की देवी मानी जाती हैं। उन्हें “वाग्देवी” तथा “शारदा” के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में माँ सरस्वती का विशेष महत्व है, क्योंकि वे मनुष्य को ज्ञान और विवेक प्रदान करती हैं। विद्यार्थियों, कलाकारों, संगीतकारों और विद्वानों द्वारा उनकी विशेष पूजा की जाती है।
माँ सरस्वती का स्वरूप अत्यंत शांत और पवित्र माना जाता है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जो पवित्रता और सत्य का प्रतीक है। उनके हाथों में वीणा, पुस्तक, माला तथा कमंडल होता है। वीणा संगीत और कला का प्रतीक है, पुस्तक ज्ञान का, माला भक्ति और साधना का तथा कमंडल पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। उनका वाहन हंस है, जो विवेक और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है।

बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन विद्यालयों, घरों और मंदिरों में उनकी आराधना की जाती है। विद्यार्थी अपनी पुस्तकों और कलम की पूजा कर ज्ञान प्राप्ति का आशीर्वाद मांगते हैं।

माँ सरस्वती के प्रमुख मंत्र

1. सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला, या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा, या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

2. बीज मंत्र

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥

3. विद्या प्राप्ति मंत्र

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥