दो गज़लें : बलजीत सिंह ‘बेनाम’

baljeet singh benaam

1. तुम्हारी यादें इनकी ज़ेबों में हरदम कंगाली है भिखमंगों की यार कहाँ दीवाली है। जागी आँखों से मैंने सपना देखा हर इक चेहरे पर छाई खुशहाली है किस पर अब विश्वास करें इस दुनिया में हर डाली को काट रहा ख़ुद माली है। जनता को बहकाता झूठे वादों से…

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कविता: ये मोहब्बतें पुरानी-सी – विवेक दाधीच

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letterbox के ज़माने कीये मोहब्बतें पुरानी-सीकिसी ख़ुशबू वाली चिट्ठी-सीकिसी भीगी शाम सुहानी-सी एक काँपते हाथ को थामतादूसरा काँपता हाथदोनों काँपते हाथअब काँपते साथ साथऔर यूँ बटोर के भरोसाचलते कदम बा कदमएक slow, romantic beautiful कहानी सीletterbox के ज़माने कीये मोहब्बतें पुरानी-सी चमकते बाल, झूलते गालटिमटिमाती आँखें, आँखों मे सवालजैसे की…

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कविता: घर आँगन – निधि गुप्ता

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बचपन से किताबों में डूबी रहीकि मेरी अपनी किताब ही कहीं खो गईलिख-लिखकर मिटाती रहीजाने किससे मैं अपनी प्रतिभा छुपाती रही। छोड़ दिया जिस चौखट को लड़कपन मेंबहुत कुछ रह गया मेरा माँ के उस आँगन में। आज भी जब कलम मिल जाती हैतो चेहरे पर कलियाँ खिल जाती हैंकलम की…

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अनकहे ख्वाबों के पन्ने

आज पिया मुझसे रूठ गएअचानक ही अजीब अनोखी सी बातें करने लगे,कहने लगे कि.. पूरा पढ़ें

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यादें……

प्रेम की भी पोषक हैं यादेंकभी बरसती भरी दुपहरीकभी टपकती हैं शामों मेंउछल कूद करतीं हृदय मेंकभी निलय से आलिंदो में……. पूरा पढ़ें

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मातृभूमि से दूर बसने की व्यथा

जन्मभूमि माँ !तू वहां मैं यहाँ।तुझ से दूर इस विदेश में बस करजीती हूँ हर पल तेरा ही नाम लेकरबरसों बीत गये बिछड़े गोद से तेरीफिर भी लगता है  तू हरदम है पास मेरीक्या इसी को कहते हैं जन्म-जन्म का नाता पूरा पढ़ें

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वेदना के तिमिर को तिरोहित करें

नेह का मंत्र लिख श्वाँस के दीप पर,  वर्तिका सम हृदय को पुरोहित करें ।काव्य की सर्जना का दिवाकर उगा,वेदना के तिमिर को  तिरोहित करें ।। पूरा पढ़ें

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जिस देह में बसते देश कई…

नीली कश्मीरी आँखों नेआज़ाद सा ख़्वाब सजाया था,जब वीर मराठों ने माथेकेसरिया तिलक लगाया था। पूरा पढ़ें

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तूं दिखादे तेरा भारत है नाम 

तोड़ दुश्मन के सपने तमाम तूं दिखादे तेरा भारत है नाम कोई लेकर के भगवे की आड़ किसे का नाम पुछ पिसे जाड़ उसकी अक्ल मैं तूं दिए बाड़ एक है गुरु अल्लाह और राम तूं दिखादे… पूरा पढ़ें

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