नीली कश्मीरी आँखों ने
आज़ाद सा ख़्वाब सजाया था,
जब वीर मराठों ने माथे
केसरिया तिलक लगाया था।
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तूं दिखादे तेरा भारत है नाम
तोड़ दुश्मन के सपने तमाम
तूं दिखादे तेरा भारत है नाम
कोई लेकर के भगवे की आड़
किसे का नाम पुछ पिसे जाड़
उसकी अक्ल मैं तूं दिए बाड़
एक है गुरु अल्लाह और राम
तूं दिखादे…
UPCA – An Introduction
एक विचार एक संगठन का निर्माण कर सकता है और समाज को बदल सकता है। इसी प्रेरणा से उत्तर प्रदेश कम्युनिटी एसोसिएशन (यूपीसीए), यू.के. का जन्म हुआ। यूपीसीए की शुरुआत यूपी के सभी लोगों को एक साथ लाने और एक मजबूत समुदाय बनाने के लिए की गई थी ताकि हर किसी को घर से दूर घर मिल सके। हमारा उद्देश्य भारतीय संस्कृति, संस्कार, कला, भाषा और साहित्य को बढ़ावा देना, अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना और दूसरी पीढ़ी के भारतीयों के लिए अंतर को कम करना है ताकि वे हमारी भाषा व् संस्कृति को समझने में सक्षम हो सकें। हालाँकि यूपीसीए की शुरुआत यूपी के लोगों के लिए की गई थी, लेकिन यह विशिष्ट भूगोल तक ही सीमित नहीं है और इसमें हमेशा अन्य राज्यों के सदस्यों का भी स्वागत किया जाता है। यूपीसीए ने क्रॉस कल्चरल सोसाइटी के निर्माण और भारतीय संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देने के अपने उद्देश्य को
ध्यान में रखते हुए कई अन्य राज्य संगठनों के साथ कार्यक्रम में सहयोग किया है।
● The World In Shades ●
It’s a six,
Or, in a mirror, it’s a nine,
Maybe the answer’s at the end of the line?
It all lies in the person’s mind.
● The Ocean’s Embrace ●
The world says the ocean is cold,
Brutal and bitter and old,
It’s merciless, devoid of hope.
वीरों को नमन
प्राण हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।
आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।।
चूम फाँसी का फन्दा मिटे देश पर।
काला पानी सहे न थके लेश भर।
सिर झुके हैं हमारे करें आचमन।
धूर्तता एक कला !
जो जितना बड़ा धूर्त, उसके व्यवहार में उतनी विनम्रता नज़र आएगी। उसकी भाषा में उतना ही लालित्य होगा । लोग चकित हो जाएंगे, अरे! यह कितना महान व्यक्ति है। लेकिन जैसे ही लोग उनसे रू-ब-रू मिलेंगे, सारा भ्रम जाता रहेगा। इस अकाट्य सत्य को अगर आज के कॉर्पोरेट और सोशल मीडिया के दौर में देखें, तो यह धूर्तता एक बकायदा ‘कला’ का रूप ले चुकी है। आजकल बाज़ार में ‘सच्चाई’ का भाव टमाटर से भी सस्ता चल रहा है, और ‘विनम्रता’ का भाव आसमान छू रहा है। नियम बड़ा सीधा है—भीतर जितना बड़ा खोखलापन होगा, बाहर उतनी ही चमकीली पैकेजिंग होगी।
कोई मुझे सिखला देना – अतुल पुष्करणा
आध्यात्मिक बने हम कैसे, कोई मुझे सिखला देना।
मन में ज्ञान का दीपक या, भक्ति का सूर्य जला देना।।