7 July 2026 | मंगलवार | आषाढ़ | अष्टमी | विक्रम संवत 2083

छोटे सद्भाव बड़े समाज

लंदन की मेट्रो में बैठे आदम ने देखा कि एक बुज़ुर्ग यात्री खड़े हैं। उसने तुरंत अपनी सीट उन्हें दे दी।

बुज़ुर्ग मुस्कुराए और बोले, “धन्यवाद बेटा।”

आदम खिड़की से बाहर देखते हुए सोचने लगा कि बड़े शहरों की असली पहचान ऊँची इमारतें नहीं, बल्कि लोगों की छोटी-छोटी अच्छाइयाँ हैं।

शिक्षा: छोटे सद्भाव बड़े समाज को बेहतर बनाते हैं।

भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर

भारत की पावन भूमि संतों और महापुरुषों की तपस्थली रही है। हमारे संतों ने समाज को प्रेम, सत्य, अहिंसा और मानवता का मार्ग दिखाया। उन्होंने अपने ज्ञान और उपदेशों से लोगों के जीवन में नई चेतना जगाई।

संत कबीरदास, तुलसीदास, गुरु नानक देव और संत रविदास जैसे महान संतों ने जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं।

हमारे संत केवल धार्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक भी थे। उनके आदर्श और शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

ब्रिटेन में गर्मियों का मौसम

ब्रिटेन के चारों मौसमों में सबसे अधिक लोकप्रिय है – ग्रीष्म, गर्मियों का मौसम। यहाँ अधिकांश समय या तो ठंड होती है या बारिश या फिर दोनों। सभी को पूरे साल गर्मियों की प्रतीक्षा होती है। ये मौसम आपको ना केवल आनंद देता है अपितु घर से बाहर निकलने को उकसाता भी है। यूँ तो वसंत और पतझड़ भी मनोरम हैं लेकिन उनमें शायद आप बाहर निकलने के लिए थोड़ा सोचोगे क्यूँकी हवा काफ़ी ठंडी होती है। ब्रिटेन में गर्मियों का मौसम लगभग मई से सितंबर तक माना जाता है।

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विश्व पुस्तक मेला

कविताओं की पुस्तक “क्या हारा क्या जीत गया” – वाणी प्रकाशनVani Prakashan – विश्व पुस्तक मेला

हिंदी कविताओं की क़िताब वो भी युवाओं के हाथ में एक अलग अनुभूति है

गीता में मन, चेतना और भारतीय मनोविज्ञान

मन क्या है? चेतना क्या है? हम अक्सर सोचते हैं क्या मनुष्य केवल शरीर और
मस्तिष्क से निकले किसी विचार का पोषक है या वह किसी उच्चतर आध्यात्मिक
सत्ता का धारक भी है? आधुनिक मनोविज्ञान इन प्रश्नों को न्यूरोलॉजी, व्यवहार और
संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के माध्यम से समझने का प्रयास करता है, जबकि भारतीय
दर्शन और विशेषतः श्रीमद्भगवद्गीता इन्हें आध्यात्मिक, नैतिक और अस्तित्वगत
संदर्भ में देखती है।

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अरुणा सब्बरवाल – रॉकिंग-चेयर

ट्रक को आते देख कर उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा। वह इतनी ख़ुश थी कि अपनी ख़ुशी को व्यक्त करने के लिए उसे शब्द नहीं मिल रहे थे। बचपन से ही उसका दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहने का सपना अब साकार होने जा रहा था। इस दिन का इंतज़ार वह बचपन से करती आई थी।

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हरिओम शरण – भक्ति, भाव और भजन का समावेश

मित्रों, हरिओम शरण जी के भजन हम दशकों से सुनते आए हैं, उनके भजनों में स्वयं को खोता देखा होगा, उनके शब्दों में और गाने की शैली ने आपको अपने इष्ट के पास ज़रूर बैठाया होगा, साथ में गुनगुनाया भी होगा। 

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ज़िदंगी एक ख़ाली कुर्सी

ला पॉइंटे

बर्मिंघम के व्यस्त इलाक़े न्यू स्ट्रीट स्टेशन के पास एक पुराना फ़्रेंच पब है ‘ला पॉइंटे’। यहाँ भी आम पबों की तरह गहमा-गहमी शाम के आसपास शुरू होती है। आमतौर पर जब पब्स के पास से गुज़रेंगे तो कुछ सिगरेट बड्स गिरे पड़े मिलेंगे, कोने में एक-दो काँच के टुकड़े, शीशे से अंदर देखने पर कुछ ख़ास समझ नहीं आयेगा। २-३ लंबी मेज़ और कुछ छोटी गोल मेज़, सामने एक लंबा-सा ऊँचा काउंटर, काउंटर के पीछे लोगों को कुछ पल के लिए  ज़िंदगी के दूसरे छोर पर ले जाने वाली बोतलें और एकदम पास बियर के विभिन्न रूप। लगभग ऐसा ही होता है पबों का लब्बोलुआब! हाँ, शोर का लेवल अलग-अलग हो सकता है, कोई पब शांत मिलेगा, किसी में घुसते ही आपके कानों में हाई डेसिबल वेव्स घुसेंगी।

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माँ सरस्वती – विद्यादायनी

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राष्ट्रकवि – मैथिलि शरण गुप्त

नर हो, न निराश करो मन को

कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को

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