पुस्तक समीक्षा: क्लाइडोस्कोप: सतरंगी स्मृतियां : ख़ुदेजा ख़ान

khudeja khan

ज़िन्दगी के साथ क़दमताल करते यादों के कारवां  हर किसी के जीवन के अपने क्लाइडोस्कोप होते हैं लगातार रंग बदलते, आकृति ग्रहण करते, नये दृश्य गढ़ते हुए। इन रंगों, आकृतियों और दृश्यों में कितना कुछ घटित होता रहता है, निर्मित होता है,परिवर्तित होता है इसका लेखा-जोखा जब लिखा जाता है…

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यात्रा-वृत्तांत: जिब्राल्टर जलसंधि कराता ‘तान्जिर’ – डॉ. आरती लोकेश

aarti lokesh

तान्जिर शहर के नाम के उच्चारण में बहुत दुविधा थी। लैटिन में यह ‘टिंगिस’ था, पुर्तगाली भाषा में ‘टैंजेर’, स्पैनिश में टांजीर, फ़्रैंच में ‘तान्जे’, अंग्रेज़ी में आने के बाद ‘तान्जीयर’ जैसा हो गया। इसका अरबी नाम ‘तंजाह’ है। सभी विदेशी इसे तान्जिर कहते हुए मिले तो वही हमने भी…

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दो गज़लें : बलजीत सिंह ‘बेनाम’

baljeet singh benaam

1. तुम्हारी यादें इनकी ज़ेबों में हरदम कंगाली है भिखमंगों की यार कहाँ दीवाली है। जागी आँखों से मैंने सपना देखा हर इक चेहरे पर छाई खुशहाली है किस पर अब विश्वास करें इस दुनिया में हर डाली को काट रहा ख़ुद माली है। जनता को बहकाता झूठे वादों से…

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कविता: तुम्हारी यादें – डॉ. कृष्ण कन्हैया

Krishn kanhaiya, namaste bharat

तुम्हारी यादेंदिल के दाहिने ख़ाने मेंबसाना चाहता हूँताकि रूक-रूक करछन-छन कर आगे बढ़ेऔर फेफड़े में अपनीअशुद्धियाँ दूर करे। और शुद्ध अंतरंग क्षणमेरे दिल के मज़बूतबाँये ख़ाने में लौट आयेंजो हृदयगति के साथनाड़ी की चाप से। घुलमिल करपूरी कोशिकाओं मेंअपना आधार तय करेंऔर हमेशा के लियेशरीर के पंच तत्व मेंविलीन हो…

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कविता: गीत-संग तुम्हारे ख़्वाब सजे – आकांक्षा द्विवेदी

namaste bharat

संग तुम्हारे ख़्वाब सजे थे, साथ तुम्हारे जाना थाफिर क्यों साथी बीच राह में हमे छोड़ कर चले गए अभी-अभी तो हम मिले थेकितनी बाते करनी थीमेरे अधरों की मुस्कानेतेरे अधरों पर सजनी थीऐसा भी क्या रूठे यारा, मुख मोड़ कर चले गए।संग तुम्हारे ख़्वाब सजे थे, साथ तुम्हारे जाना…

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कविता: ये मोहब्बतें पुरानी-सी – विवेक दाधीच

vivek sharma, naamstey bharat

letterbox के ज़माने कीये मोहब्बतें पुरानी-सीकिसी ख़ुशबू वाली चिट्ठी-सीकिसी भीगी शाम सुहानी-सी एक काँपते हाथ को थामतादूसरा काँपता हाथदोनों काँपते हाथअब काँपते साथ साथऔर यूँ बटोर के भरोसाचलते कदम बा कदमएक slow, romantic beautiful कहानी सीletterbox के ज़माने कीये मोहब्बतें पुरानी-सी चमकते बाल, झूलते गालटिमटिमाती आँखें, आँखों मे सवालजैसे की…

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साक्षात्कार: मंजुश्री से डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे का साहित्यिक संवाद

ritu sharma, namaste bharat

वरिष्ठ साहित्यकार व “कथाबिंब पत्रिका की संपादक मंजुश्री से डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे का साहित्यिक संवाद साहित्य में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो ख़ुद को केवल एक विधा तक सीमित नहीं रखते; बल्कि उनका पूरा जीवन ही एक साहित्यिक संस्था बन जाता है। आदरणीय मंजु श्री जी हिन्दी…

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पाँच ग़ज़लें – गिरीश पंकज

girish pankaj, namaste bharat

जहाँ कभी था वहीं आज जहाँ कभी था वहीं आज वो कुंठित बेचाराअपने में ही घुलता रहता चिंतित बेचारा जीवन भर नाकाम रहा बस इसीलिए अब तोदेख किसी की असफलता को हर्षित बेचारा देख ज़माने की उपलब्धि राख हुआ जाएइसलिए खुद उपलब्धि से वंचित बेचारा दूजों को निपटाना है पर…

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कविता : रीज़ को पहुँचा आई – कमलजीत कौर

kamaljeet kaur, namaste bharat

रीज़ को पहुँचा कर आ गईसपनों की देहरी तकजहाँ अब वह स्वयं करेगी चुनावअपने अनुभवों को देगी आकारअपने विचारों को देगी नया विस्तार। कितने अनजाने लोगों सेअब उसका होगा परिचयकितनी नई बातें होंगीकितने नए अनुभवों का संचय। छोटी-सी गुड़िया मेरीआज से अकेली रहेगीअब किसको देगीअपनी जादू-सी झप्पी? बार-बार यही विचारमन…

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कविता: “पाँव” – डॉ नंदिता साहू

nandita sahu, hidni, namastey bharat

भीड़ से भरे रास्ते पर चलते है  कई जोड़ी पाँव कोई रफ़्तार से भागता हुआ ज़िन्दगी की राह को नापता हुआ। कोई नपे तुले अंदाज़ में सफ़र काटता हुआ। किसी के संग एक जोड़ी पाँव और है सफ़र ख़त्म ना हो, इस आस में टहलता हुआ। एक जोड़ी पाँव ऐसा…

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