9 August 2026 | Sunday | रविवार | श्रावण | एकादशी | विक्रम संवत 2083

कार्य ही विश्राम – मधुरेश मिश्रा

जब कार्य ही विश्राम हो
और गति ही आराम हो।
श्री राम जैसा संघर्ष हो
श्री कृष्ण जैसा विमर्श हो।।

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जब कार्य ही विश्राम हो
और गति ही आराम हो।
श्री राम जैसा संघर्ष हो
श्री कृष्ण जैसा विमर्श हो।।

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संवाद शेष

सुनो बेटा!

क्या मम्मी, सुबह सुबह!

सुनिये

शाम को बात करते हैं।

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सुनो बेटा!

क्या मम्मी, सुबह सुबह!

सुनिये

शाम को बात करते हैं।

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मनी–मशीन

अब मेरे चारों ओर
रंगीन तितलियाँ नहीं उड़ती
और न ही अब छोटे बच्चे
तितलियों के पीछे भागते हैं
फूलों से सुगंध भी
अब खोने लगी है
बचपन अपने पीठ पर
बचपना ढोने लगी है।

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अनकहे ख्वाबों के पत्र


आज पिया मुझसे रूठ गए
अचानक ही अजीब अनोखी सी बातें करने लगे,

कहने लगे कि..

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मातृभूमि से दूर बसने की व्यथा

जन्मभूमि माँ !
तू वहां मैं यहाँ।
तुझ से दूर इस विदेश में बस कर
जीती हूँ हर पल तेरा ही नाम लेकर
बरसों बीत गये बिछड़े गोद से तेरी
फिर भी लगता है  तू हरदम है पास मेरी
क्या इसी को कहते हैं जन्म-जन्म का नाता

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वेदना के तिमिर को तिरोहित करें

नेह का मंत्र लिख श्वाँस के दीप पर,  
वर्तिका सम हृदय को पुरोहित करें ।
काव्य की सर्जना का दिवाकर उगा,
वेदना के तिमिर को  तिरोहित करें ।।

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जिस देह में बसते देश कई…

नीली कश्मीरी आँखों ने
आज़ाद सा ख़्वाब सजाया था,
जब वीर मराठों ने माथे
केसरिया तिलक लगाया था।

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तूं दिखादे तेरा भारत है नाम 

तोड़ दुश्मन के सपने तमाम 
तूं दिखादे तेरा भारत है नाम 

कोई लेकर के भगवे की आड़ 
किसे का नाम पुछ पिसे जाड़ 
उसकी अक्ल मैं तूं दिए बाड़ 
एक है गुरु अल्लाह और राम 
तूं दिखादे…

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वीरों को नमन 

प्राण हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।
आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।।

चूम फाँसी का फन्दा मिटे देश पर।
काला पानी सहे न थके लेश भर।
सिर झुके हैं हमारे करें आचमन।

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कोई मुझे सिखला देना – अतुल पुष्करणा

आध्यात्मिक बने हम कैसे, कोई मुझे सिखला देना। 
मन में ज्ञान का दीपक या, भक्ति का सूर्य जला देना।।

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