दो गज़लें : बलजीत सिंह ‘बेनाम’

baljeet singh benaam

1. तुम्हारी यादें इनकी ज़ेबों में हरदम कंगाली है भिखमंगों की यार कहाँ दीवाली है। जागी आँखों से मैंने सपना देखा हर इक चेहरे पर छाई खुशहाली है किस पर अब विश्वास करें इस दुनिया में हर डाली को काट रहा ख़ुद माली है। जनता को बहकाता झूठे वादों से…

Read More →

कविता: तुम्हारी यादें – डॉ. कृष्ण कन्हैया

Krishn kanhaiya, namaste bharat

तुम्हारी यादेंदिल के दाहिने ख़ाने मेंबसाना चाहता हूँताकि रूक-रूक करछन-छन कर आगे बढ़ेऔर फेफड़े में अपनीअशुद्धियाँ दूर करे। और शुद्ध अंतरंग क्षणमेरे दिल के मज़बूतबाँये ख़ाने में लौट आयेंजो हृदयगति के साथनाड़ी की चाप से। घुलमिल करपूरी कोशिकाओं मेंअपना आधार तय करेंऔर हमेशा के लियेशरीर के पंच तत्व मेंविलीन हो…

Read More →

कविता: गीत-संग तुम्हारे ख़्वाब सजे – आकांक्षा द्विवेदी

namaste bharat

संग तुम्हारे ख़्वाब सजे थे, साथ तुम्हारे जाना थाफिर क्यों साथी बीच राह में हमे छोड़ कर चले गए अभी-अभी तो हम मिले थेकितनी बाते करनी थीमेरे अधरों की मुस्कानेतेरे अधरों पर सजनी थीऐसा भी क्या रूठे यारा, मुख मोड़ कर चले गए।संग तुम्हारे ख़्वाब सजे थे, साथ तुम्हारे जाना…

Read More →

कविता: ये मोहब्बतें पुरानी-सी – विवेक दाधीच

vivek sharma, naamstey bharat

letterbox के ज़माने कीये मोहब्बतें पुरानी-सीकिसी ख़ुशबू वाली चिट्ठी-सीकिसी भीगी शाम सुहानी-सी एक काँपते हाथ को थामतादूसरा काँपता हाथदोनों काँपते हाथअब काँपते साथ साथऔर यूँ बटोर के भरोसाचलते कदम बा कदमएक slow, romantic beautiful कहानी सीletterbox के ज़माने कीये मोहब्बतें पुरानी-सी चमकते बाल, झूलते गालटिमटिमाती आँखें, आँखों मे सवालजैसे की…

Read More →

पाँच ग़ज़लें – गिरीश पंकज

girish pankaj, namaste bharat

जहाँ कभी था वहीं आज जहाँ कभी था वहीं आज वो कुंठित बेचाराअपने में ही घुलता रहता चिंतित बेचारा जीवन भर नाकाम रहा बस इसीलिए अब तोदेख किसी की असफलता को हर्षित बेचारा देख ज़माने की उपलब्धि राख हुआ जाएइसलिए खुद उपलब्धि से वंचित बेचारा दूजों को निपटाना है पर…

Read More →

कविता : रीज़ को पहुँचा आई – कमलजीत कौर

kamaljeet kaur, namaste bharat

रीज़ को पहुँचा कर आ गईसपनों की देहरी तकजहाँ अब वह स्वयं करेगी चुनावअपने अनुभवों को देगी आकारअपने विचारों को देगी नया विस्तार। कितने अनजाने लोगों सेअब उसका होगा परिचयकितनी नई बातें होंगीकितने नए अनुभवों का संचय। छोटी-सी गुड़िया मेरीआज से अकेली रहेगीअब किसको देगीअपनी जादू-सी झप्पी? बार-बार यही विचारमन…

Read More →

कविता: “पाँव” – डॉ नंदिता साहू

nandita sahu, hidni, namastey bharat

भीड़ से भरे रास्ते पर चलते है  कई जोड़ी पाँव कोई रफ़्तार से भागता हुआ ज़िन्दगी की राह को नापता हुआ। कोई नपे तुले अंदाज़ में सफ़र काटता हुआ। किसी के संग एक जोड़ी पाँव और है सफ़र ख़त्म ना हो, इस आस में टहलता हुआ। एक जोड़ी पाँव ऐसा…

Read More →

कवयित्रि: एक माँ एक कुम्हार – अंकिता साहिबा

ankita sahiba, namaste bharat, hindi, britain

बहुत सारे लोग पूछते हैं – कैसा चल रहा है आपका पोस्टपार्टमऔर मदरहुड का सफ़र?शिक़ायतें तो बहुत हैं, मगर ज़िंदगी से कोई शिक़ायत नहीं।क्योंकि इस बार हमने कुम्हार का क़िरदार निभाया है।एक नन्हे से जीवन को आकार दिया है,उसे गढ़ा है, सँवारा है और अब उसे बेहतर बनाने में व्यस्त…

Read More →

कविता: मीरांगिणी – प्रदीप अग्रवाल 

pradeep aggrawal, namaste bharat, hindi kavita, britain

ए मेरी मीरांगिणीइतना भी न कर प्रेम मुझसेकि मेरे मौन को फिर सेस्वर लेना पड़ जाए। ए मेरी मीरांगिणीइतना भी न कर प्रेम मुझसेकि फिर से मुझेअवतार लेना पड़ जाए। अंतरा १ (कृष्ण) मैं जो सर्वत्र हूँ, अनाम हूँतेरी एक दृष्टि में ठहरता हूँ।तेरी भक्ति के तप मेंनिराकार होकर भीछाया…

Read More →

कविता: घर आँगन – निधि गुप्ता

nidhi gupta, kavita, hindi, britain, namaste bharat

बचपन से किताबों में डूबी रहीकि मेरी अपनी किताब ही कहीं खो गईलिख-लिखकर मिटाती रहीजाने किससे मैं अपनी प्रतिभा छुपाती रही। छोड़ दिया जिस चौखट को लड़कपन मेंबहुत कुछ रह गया मेरा माँ के उस आँगन में। आज भी जब कलम मिल जाती हैतो चेहरे पर कलियाँ खिल जाती हैंकलम की…

Read More →