प्राण हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।
आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।।
चूम फाँसी का फन्दा मिटे देश पर।
काला पानी सहे न थके लेश भर।
सिर झुके हैं हमारे करें आचमन।
रक्त हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।
आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।१।
देश की साँस हो भाल टीका तुम्हीं।
हो तुम्हीं मान सम्मान गीता तुम्हीं।
हो तुम्हीं कृष्ण के मुख से निकले वचन।
तेज हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।
आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।२।
लिख गए देशभक्ति की पावन ऋचा।
रक्त की धार से तुमने सावन लिखा।
देश से प्रेम का लिख गए व्याकरण।
ओज हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।
आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।३।
मावले बावले सिरफ़िरे बन जिये।
देश के नाम पर सब निछावर किये।
सिर हथेली पे रखकर किये थे हवन।।
नाद हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।
आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।४।
गर्व हो तुम हमारा तुम्हीं दर्प हो।
युग युगों तक विजयश्री का सन्दर्भ हो।
रक्त में कण्ठ में शौर्यता के गगन।
घोष हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।
आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।५।
– विनय विक्रम सिंह #मनकही