कविता: थोड़ा पास आओ तो बात बन जाए – विवेक मिश्रा

Vivek Mishra, Hindi Kavita, Namstey Bharat

थोड़ा पास आओ तो बात बन जाएथोड़ा मुस्करायो तो बात बन जाएरिश्तों में कड़वाहट अच्छी नहीं होतीथोड़ा मिठास ले आओ तो बात बन जाए। जिंदगी सिखाती है जीने के सब सबकतुम भी समझ जाओ तो बात बन जाएदोस्तों की भीड़ लगाने से कुछ नहीं होताकोई एक दोस्त बनाओ तो बात…

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अहंकारी नव कोंपलें

Preet Arora, Namastey Bharat, hindi, kavita

नई कोपले वृक्षों को आँख दिखाने लगीअ॑ह के जर्रे आंधियों से टकराने लगी जिनकी मेरुदंड अभी सीधी भी न होने पाईवो अंकुर अब बरगद को गिराने लगी है पोषित जो स्वयं शाखाओं के सहारेनव पल्लव अब टहनियों पर शासन चलाने लगी स्वयं का वजूद भी बना ना पाया जो कनखावो…

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कार्य ही विश्राम – मधुरेश मिश्रा

जब कार्य ही विश्राम होऔर गति ही आराम हो।श्री राम जैसा संघर्ष होश्री कृष्ण जैसा विमर्श हो।।जब हनुमान जैसी वीरता होऔर अर्जुन जैसी एकाग्रता हो।तब जीत का संशय कहाँ?और हार का भी भय कहाँ?जब कर्त्तव्य ही पूजा होऔर ध्येय ही मंज़िल हो।जब संघर्ष ही एषणा होऔर चुनौती ही प्रेरणा हो।जब…

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संवाद शेष

सुनो बेटा! क्या मम्मी, सुबह सुबह! सुनिये शाम को बात करते हैं। पूरा पढ़ें सुनो बेटा! क्या मम्मी, सुबह सुबह! सुनिये शाम को बात करते हैं। पूरा पढ़ें

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मनी–मशीन

अब मेरे चारों ओररंगीन तितलियाँ नहीं उड़तीऔर न ही अब छोटे बच्चेतितलियों के पीछे भागते हैंफूलों से सुगंध भीअब खोने लगी हैबचपन अपने पीठ परबचपना ढोने लगी है। पूरा पढ़ें

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अनकहे ख्वाबों के पन्ने

आज पिया मुझसे रूठ गएअचानक ही अजीब अनोखी सी बातें करने लगे,कहने लगे कि.. पूरा पढ़ें

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यादें……

प्रेम की भी पोषक हैं यादेंकभी बरसती भरी दुपहरीकभी टपकती हैं शामों मेंउछल कूद करतीं हृदय मेंकभी निलय से आलिंदो में……. पूरा पढ़ें

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मातृभूमि से दूर बसने की व्यथा

जन्मभूमि माँ !तू वहां मैं यहाँ।तुझ से दूर इस विदेश में बस करजीती हूँ हर पल तेरा ही नाम लेकरबरसों बीत गये बिछड़े गोद से तेरीफिर भी लगता है  तू हरदम है पास मेरीक्या इसी को कहते हैं जन्म-जन्म का नाता पूरा पढ़ें

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वेदना के तिमिर को तिरोहित करें

नेह का मंत्र लिख श्वाँस के दीप पर,  वर्तिका सम हृदय को पुरोहित करें ।काव्य की सर्जना का दिवाकर उगा,वेदना के तिमिर को  तिरोहित करें ।। पूरा पढ़ें

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जिस देह में बसते देश कई…

नीली कश्मीरी आँखों नेआज़ाद सा ख़्वाब सजाया था,जब वीर मराठों ने माथेकेसरिया तिलक लगाया था। पूरा पढ़ें

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