नेह का मंत्र लिख श्वाँस के दीप पर, वर्तिका सम हृदय को पुरोहित करें ।काव्य की सर्जना का दिवाकर उगा,वेदना के तिमिर को तिरोहित करें ।। पूरा पढ़ें
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