जन्मभूमि माँ !
तू वहां मैं यहाँ।
तुझ से दूर इस विदेश में बस कर
जीती हूँ हर पल तेरा ही नाम लेकर
बरसों बीत गये बिछड़े गोद से तेरी
फिर भी लगता है तू हरदम है पास मेरी
क्या इसी को कहते हैं जन्म-जन्म का नाता
जन्मभूमि माँ !
तू वहां मैं यहाँ।
तुझ से दूर इस विदेश में बस कर
जीती हूँ हर पल तेरा ही नाम लेकर
बरसों बीत गये बिछड़े गोद से तेरी
फिर भी लगता है तू हरदम है पास मेरी
क्या इसी को कहते हैं जन्म-जन्म का नाता