वीरों को नमन 

प्राण हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।।चूम फाँसी का फन्दा मिटे देश पर।काला पानी सहे न थके लेश भर।सिर झुके हैं हमारे करें आचमन। पूरा पढ़ें

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कोई मुझे सिखला देना – अतुल पुष्करणा

आध्यात्मिक बने हम कैसे, कोई मुझे सिखला देना। मन में ज्ञान का दीपक या, भक्ति का सूर्य जला देना।। पूरा पढ़ें

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माँ का फ़ोन

मुझे याद है माँ रोज़ फ़ोन करती थी और एक ही सवाल पूछा करती थी-तू कैसा है ? पूरा पढ़ें

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दूर  उतनी   ही   राह  होती  है – कपिल कुमार

कमज़ोर जितनी  चाह होती है दूर  उतनी   ही   राह  होती  है  पूरा पढ़ें

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ब्रह्मांड

अद्भुत है दास्तान सृष्टि के निर्माण की सर्वव्यापी विश्व में असीम ब्रह्मांड की।वही ब्रह्मांड भीतर खिला है जो विस्तृत है बाहरविस्मित हृदय पूछे कौन है यह विचित्र सृजनहार  पूरा पढ़ें

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ख़्वाब चला गया – जितेंद्र गुप्ता | कविता

ख़्वाब चला गया आँख खुली तो, फिर ख़्वाब चला गया, जी बहलाने का एक, बहाना चला गया।  याद रहता नही कुछ भी, अब यादों के सिवा,यादों में खोकर, जीने का सहारा रह गया।  पूरा पढ़ें

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