मुझे याद है
माँ रोज़ फ़ोन करती थी
और एक ही सवाल पूछा करती थी-
तू कैसा है ?
kavita
ब्रह्मांड
अद्भुत है दास्तान सृष्टि के निर्माण की
सर्वव्यापी विश्व में असीम ब्रह्मांड की।
वही ब्रह्मांड भीतर खिला है जो विस्तृत है बाहर
विस्मित हृदय पूछे कौन है यह विचित्र सृजनहार
ख़्वाब चला गया – जितेंद्र गुप्ता | कविता
ख़्वाब चला गया
आँख खुली तो, फिर ख़्वाब चला गया,
जी बहलाने का एक, बहाना चला गया।
याद रहता नही कुछ भी, अब यादों के सिवा,
यादों में खोकर, जीने का सहारा रह गया।