मनी–मशीन

अब मेरे चारों ओररंगीन तितलियाँ नहीं उड़तीऔर न ही अब छोटे बच्चेतितलियों के पीछे भागते हैंफूलों से सुगंध भीअब खोने लगी हैबचपन अपने पीठ परबचपना ढोने लगी है। पूरा पढ़ें

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अनकहे ख्वाबों के पन्ने

आज पिया मुझसे रूठ गएअचानक ही अजीब अनोखी सी बातें करने लगे,कहने लगे कि.. पूरा पढ़ें

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यादें……

प्रेम की भी पोषक हैं यादेंकभी बरसती भरी दुपहरीकभी टपकती हैं शामों मेंउछल कूद करतीं हृदय मेंकभी निलय से आलिंदो में……. पूरा पढ़ें

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मातृभूमि से दूर बसने की व्यथा

जन्मभूमि माँ !तू वहां मैं यहाँ।तुझ से दूर इस विदेश में बस करजीती हूँ हर पल तेरा ही नाम लेकरबरसों बीत गये बिछड़े गोद से तेरीफिर भी लगता है  तू हरदम है पास मेरीक्या इसी को कहते हैं जन्म-जन्म का नाता पूरा पढ़ें

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वेदना के तिमिर को तिरोहित करें

नेह का मंत्र लिख श्वाँस के दीप पर,  वर्तिका सम हृदय को पुरोहित करें ।काव्य की सर्जना का दिवाकर उगा,वेदना के तिमिर को  तिरोहित करें ।। पूरा पढ़ें

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तूं दिखादे तेरा भारत है नाम 

तोड़ दुश्मन के सपने तमाम तूं दिखादे तेरा भारत है नाम कोई लेकर के भगवे की आड़ किसे का नाम पुछ पिसे जाड़ उसकी अक्ल मैं तूं दिए बाड़ एक है गुरु अल्लाह और राम तूं दिखादे… पूरा पढ़ें

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वीरों को नमन 

प्राण हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।।चूम फाँसी का फन्दा मिटे देश पर।काला पानी सहे न थके लेश भर।सिर झुके हैं हमारे करें आचमन। पूरा पढ़ें

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धूर्तता एक कला !

जो जितना बड़ा धूर्त, उसके व्यवहार में उतनी विनम्रता नज़र आएगी। उसकी भाषा में उतना ही लालित्य होगा । लोग चकित हो जाएंगे, अरे! यह कितना महान व्यक्ति है। लेकिन जैसे ही लोग उनसे रू-ब-रू मिलेंगे, सारा भ्रम जाता रहेगा। इस अकाट्य सत्य को अगर आज के कॉर्पोरेट और सोशल…

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कोई मुझे सिखला देना – अतुल पुष्करणा

आध्यात्मिक बने हम कैसे, कोई मुझे सिखला देना। मन में ज्ञान का दीपक या, भक्ति का सूर्य जला देना।। पूरा पढ़ें

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माँ का फ़ोन

मुझे याद है माँ रोज़ फ़ोन करती थी और एक ही सवाल पूछा करती थी-तू कैसा है ? पूरा पढ़ें

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