दूर  उतनी   ही   राह  होती  है – कपिल कुमार

कमज़ोर जितनी  चाह होती है दूर  उतनी   ही   राह  होती  है  पूरा पढ़ें

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ब्रह्मांड

अद्भुत है दास्तान सृष्टि के निर्माण की सर्वव्यापी विश्व में असीम ब्रह्मांड की।वही ब्रह्मांड भीतर खिला है जो विस्तृत है बाहरविस्मित हृदय पूछे कौन है यह विचित्र सृजनहार  पूरा पढ़ें

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ख़्वाब चला गया – जितेंद्र गुप्ता | कविता

ख़्वाब चला गया आँख खुली तो, फिर ख़्वाब चला गया, जी बहलाने का एक, बहाना चला गया।  याद रहता नही कुछ भी, अब यादों के सिवा,यादों में खोकर, जीने का सहारा रह गया।  पूरा पढ़ें

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ज़िदंगी एक ख़ाली कुर्सी

आशीष मिश्रा ला पॉइंटे बर्मिंघम के व्यस्त इलाक़े न्यू स्ट्रीट स्टेशन के पास एक पुराना फ़्रेंच पब है ‘ला पॉइंटे’। यहाँ भी आम पबों की तरह गहमा-गहमी शाम के आसपास शुरू होती है। आमतौर पर जब पब्स के पास से गुज़रेंगे तो कुछ सिगरेट बड्स गिरे पड़े मिलेंगे, कोने में…

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