आध्यात्मिक बने हम कैसे, कोई मुझे सिखला देना।
मन में ज्ञान का दीपक या, भक्ति का सूर्य जला देना।।
कविता || कहानी || लेख
ब्रह्मांड
अद्भुत है दास्तान सृष्टि के निर्माण की
सर्वव्यापी विश्व में असीम ब्रह्मांड की।
वही ब्रह्मांड भीतर खिला है जो विस्तृत है बाहर
विस्मित हृदय पूछे कौन है यह विचित्र सृजनहार
ख़्वाब चला गया – जितेंद्र गुप्ता | कविता
ख़्वाब चला गया
आँख खुली तो, फिर ख़्वाब चला गया,
जी बहलाने का एक, बहाना चला गया।
याद रहता नही कुछ भी, अब यादों के सिवा,
यादों में खोकर, जीने का सहारा रह गया।
ज़िदंगी एक ख़ाली कुर्सी
आशीष मिश्रा

ला पॉइंटे
बर्मिंघम के व्यस्त इलाक़े न्यू स्ट्रीट स्टेशन के पास एक पुराना फ़्रेंच पब है ‘ला पॉइंटे’। यहाँ भी आम पबों की तरह गहमा-गहमी शाम के आसपास शुरू होती है। आमतौर पर जब पब्स के पास से गुज़रेंगे तो कुछ सिगरेट बड्स गिरे पड़े मिलेंगे, कोने में एक-दो काँच के टुकड़े, शीशे से अंदर देखने पर कुछ ख़ास समझ नहीं आयेगा। २-३ लंबी मेज़ और कुछ छोटी गोल मेज़, सामने एक लंबा-सा ऊँचा काउंटर, काउंटर के पीछे लोगों को कुछ पल के लिए ज़िंदगी के दूसरे छोर पर ले जाने वाली बोतलें और एकदम पास बियर के विभिन्न रूप। लगभग ऐसा ही होता है पबों का लब्बोलुआब! हाँ, शोर का लेवल अलग-अलग हो सकता है, कोई पब शांत मिलेगा, किसी में घुसते ही आपके कानों में हाई डेसिबल वेव्स घुसेंगी।
