अधूरी आस – नीतू सिन्हा “नीत”

इक आस हरदम ही बे-आस रहीमैं ताउम्र खुद की बनकर प्यास रहीजुबां पकी इतनी कि सड़ने लगीतबियत में सभी के मगर खटास रही पूरा पढ़ें

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