ख़्वाब चला गया – जितेंद्र गुप्ता | कविता

ख़्वाब चला गया आँख खुली तो, फिर ख़्वाब चला गया, जी बहलाने का एक, बहाना चला गया।  याद रहता नही कुछ भी, अब यादों के सिवा,यादों में खोकर, जीने का सहारा रह गया।  पूरा पढ़ें

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