तोड़ दुश्मन के सपने तमाम तूं दिखादे तेरा भारत है नाम कोई लेकर के भगवे की आड़ किसे का नाम पुछ पिसे जाड़ उसकी अक्ल मैं तूं दिए बाड़ एक है गुरु अल्लाह और राम तूं दिखादे… पूरा पढ़ें
Read More →कविता
kavita
वीरों को नमन
प्राण हो तुम तिरंगे के तुमको नमन।आज स्वाधीन तुमसे हमारा वतन।।चूम फाँसी का फन्दा मिटे देश पर।काला पानी सहे न थके लेश भर।सिर झुके हैं हमारे करें आचमन। पूरा पढ़ें
Read More →कोई मुझे सिखला देना – अतुल पुष्करणा
आध्यात्मिक बने हम कैसे, कोई मुझे सिखला देना। मन में ज्ञान का दीपक या, भक्ति का सूर्य जला देना।। पूरा पढ़ें
Read More →माँ का फ़ोन
मुझे याद है माँ रोज़ फ़ोन करती थी और एक ही सवाल पूछा करती थी-तू कैसा है ? पूरा पढ़ें
Read More →दूर उतनी ही राह होती है – कपिल कुमार
कमज़ोर जितनी चाह होती है दूर उतनी ही राह होती है पूरा पढ़ें
Read More →ब्रह्मांड
अद्भुत है दास्तान सृष्टि के निर्माण की सर्वव्यापी विश्व में असीम ब्रह्मांड की।वही ब्रह्मांड भीतर खिला है जो विस्तृत है बाहरविस्मित हृदय पूछे कौन है यह विचित्र सृजनहार पूरा पढ़ें
Read More →अधूरी आस – नीतू सिन्हा “नीत”
इक आस हरदम ही बे-आस रहीमैं ताउम्र खुद की बनकर प्यास रहीजुबां पकी इतनी कि सड़ने लगीतबियत में सभी के मगर खटास रही पूरा पढ़ें
Read More →ख़्वाब चला गया – जितेंद्र गुप्ता | कविता
ख़्वाब चला गया आँख खुली तो, फिर ख़्वाब चला गया, जी बहलाने का एक, बहाना चला गया। याद रहता नही कुछ भी, अब यादों के सिवा,यादों में खोकर, जीने का सहारा रह गया। पूरा पढ़ें
Read More →राष्ट्रकवि – मैथिलि शरण गुप्त
नर हो, न निराश करो मन कोकुछ काम करो, कुछ काम करोजग में रह कर कुछ नाम करोयह जन्म हुआ किस अर्थ अहोसमझो जिसमें यह व्यर्थ न होकुछ तो उपयुक्त करो तन कोनर हो, न निराश करो मन को पूरा पढ़ें
Read More →आशीष मिश्रा की कवितायेँ
समय बहुत सा बीत गया समय बहुत सा बीत गयाबहुत समय था रीत गया।अनुभव आपहि बोलेगाक्या हारा क्या जीत गया।। पूरा पढ़ें
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