विश्व पुस्तक मेला

कविताओं की पुस्तक “क्या हारा क्या जीत गया” – वाणी प्रकाशनVani Prakashan – विश्व पुस्तक मेला

हिंदी कविताओं की क़िताब वो भी युवाओं के हाथ में एक अलग अनुभूति है

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गीता में मन, चेतना और भारतीय मनोविज्ञान

मन क्या है? चेतना क्या है? हम अक्सर सोचते हैं क्या मनुष्य केवल शरीर और
मस्तिष्क से निकले किसी विचार का पोषक है या वह किसी उच्चतर आध्यात्मिक
सत्ता का धारक भी है? आधुनिक मनोविज्ञान इन प्रश्नों को न्यूरोलॉजी, व्यवहार और
संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं के माध्यम से समझने का प्रयास करता है, जबकि भारतीय
दर्शन और विशेषतः श्रीमद्भगवद्गीता इन्हें आध्यात्मिक, नैतिक और अस्तित्वगत
संदर्भ में देखती है।

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अरुणा सब्बरवाल – रॉकिंग-चेयर

ट्रक को आते देख कर उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा। वह इतनी ख़ुश थी कि अपनी ख़ुशी को व्यक्त करने के लिए उसे शब्द नहीं मिल रहे थे। बचपन से ही उसका दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहने का सपना अब साकार होने जा रहा था। इस दिन का इंतज़ार वह बचपन से करती आई थी।

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हरिओम शरण – भक्ति, भाव और भजन का समावेश

मित्रों, हरिओम शरण जी के भजन हम दशकों से सुनते आए हैं, उनके भजनों में स्वयं को खोता देखा होगा, उनके शब्दों में और गाने की शैली ने आपको अपने इष्ट के पास ज़रूर बैठाया होगा, साथ में गुनगुनाया भी होगा। 

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ज़िदंगी एक ख़ाली कुर्सी

ला पॉइंटे

बर्मिंघम के व्यस्त इलाक़े न्यू स्ट्रीट स्टेशन के पास एक पुराना फ़्रेंच पब है ‘ला पॉइंटे’। यहाँ भी आम पबों की तरह गहमा-गहमी शाम के आसपास शुरू होती है। आमतौर पर जब पब्स के पास से गुज़रेंगे तो कुछ सिगरेट बड्स गिरे पड़े मिलेंगे, कोने में एक-दो काँच के टुकड़े, शीशे से अंदर देखने पर कुछ ख़ास समझ नहीं आयेगा। २-३ लंबी मेज़ और कुछ छोटी गोल मेज़, सामने एक लंबा-सा ऊँचा काउंटर, काउंटर के पीछे लोगों को कुछ पल के लिए  ज़िंदगी के दूसरे छोर पर ले जाने वाली बोतलें और एकदम पास बियर के विभिन्न रूप। लगभग ऐसा ही होता है पबों का लब्बोलुआब! हाँ, शोर का लेवल अलग-अलग हो सकता है, कोई पब शांत मिलेगा, किसी में घुसते ही आपके कानों में हाई डेसिबल वेव्स घुसेंगी।

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माँ सरस्वती – विद्यादायनी

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राष्ट्रकवि – मैथिलि शरण गुप्त

नर हो, न निराश करो मन को

कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को

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