1. तुम्हारी यादें
इनकी ज़ेबों में हरदम कंगाली है
भिखमंगों की यार कहाँ दीवाली है।
जागी आँखों से मैंने सपना देखा
हर इक चेहरे पर छाई खुशहाली है
किस पर अब विश्वास करें इस दुनिया में
हर डाली को काट रहा ख़ुद माली है।
जनता को बहकाता झूठे वादों से
जिसका हर इक आँसू ही घड़ियाली है।
2. मज़हबी दंगे
मज़हबी दंगे कराता कौन है
मुफ़लिसों के घर जलाता कौन है।
जब ख़ुदा है ही नहीं तो दोस्तो
हर मुसीबत से बचाता कौन है।
हो गया ऊँचे मकानों का चलन!
खोल कर खिड़की बुलाता कौन है।
इस तसव्वुर ने किया पागल मुझे
मेरे दुश्मन को सताता कौन है
बलजीत सिंह ‘बेनाम’ – हांसी, जिला-हिसार, हरियाणा (भारत)