मातृभूमि से दूर बसने की व्यथा

जन्मभूमि माँ !तू वहां मैं यहाँ।तुझ से दूर इस विदेश में बस करजीती हूँ हर पल तेरा ही नाम लेकरबरसों बीत गये बिछड़े गोद से तेरीफिर भी लगता है  तू हरदम है पास मेरीक्या इसी को कहते हैं जन्म-जन्म का नाता पूरा पढ़ें

Read More →