9 August 2026 | Sunday | रविवार | श्रावण | एकादशी | विक्रम संवत 2083

पत्रिका लेखकीय संस्कार भी विकसित करेगी.

प्रिय आशीष मिश्र जी,
मुझे यह जानकर अति प्रसन्नता हुई कि ब्रिटेन से ‘नमस्ते भारत’ नामक एक पत्रिका का प्रकाशन होने जा रहा है. मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह पत्रिका ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों को न केवल भारत से जोड़ेगी, वरन उनके भीतर सनातन परंपरा के बोध को भी विकसित करेगी. खासकर वहाँ रहने वाले भारतीय मूल के बच्चों को भारत से और हिंदी से जोड़ने का एक सुंदर पुल बनाने का काम करेगी. यह पत्रिका लेखकीय संस्कार भी विकसित करेगी.  मुझे इस पत्रिका से जोड़ने की भावना का मैं सम्मान करते हुए अपनी सहर्ष सहमति प्रदान करता हूँ.

 गिरीश पंकज
 प्रांतीय अध्यक्ष
 छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति,
 रायपुर (भारत)

अरुणा अजितसरिया, लेखक, साहित्यकार

पुरवाई और वातायनम की शृंखला में लंदन से एक नयी पत्रिका, ‘नमस्ते भारत’ का विमोचन यूके में हिंदी के
वर्चस्व को समृद्ध करने का शंखनाद है। मुझे प्रसन्नता है कि हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार और प्रसार में
युवा पीढ़ी पूरी सर्जनात्मक ऊर्जा सहित सक्रिय हो रही है।

आशा है हिंदी के साथ अंग्रेज़ी भाषा की रचनाओं का
समावेश ‘नमस्ते भारत’ को जेनरेशन ज़ी के लिए हिंदी में अभिव्यक्ति की सीमा को पार कर उनकी सर्जनात्मक
प्रतिभा को भी प्रेरित और प्रोत्साहित करेगा।

सम्पादक की भूमिका में प्रिय आशीष जी को देखना मेरे लिए
व्यक्तिगत रूप से अत्यंत प्रसन्नता दायक है। उनकी प्रतिभा, कर्मठता और हिंदी के प्रति समर्पण पत्रिका के
उद्देश्य को सफल बनाए और पत्रिका के सम्पादक की महत्वपूर्ण भूमिका में उनके श्रम को यश मिले, इस
शुभकामना सहित मेरी हार्दिक बधाई।

डॉ अरुणा अजितसरिया एम बी ई


हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ – डॉ पद्मेश गुप्त

प्रिय आशीष मिश्र जी,

“नमस्ते भारत” पत्रिका के शुभारम्भ एवं लोकार्पण पर आपको हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।

यह केवल एक पत्रिका का प्रकाशन नहीं, बल्कि भारत और विश्व के हिंदी एवं अंग्रेज़ी साहित्य, संस्कृति और सृजनशीलता के बीच एक सशक्त सेतु स्थापित करने का प्रेरणादायी प्रयास है। आज के डिजिटल युग में लेखन, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नया मंच देना अत्यंत सराहनीय कार्य है।

“जितना लिखोगे, उतना निखरोगे” का आपका संदेश निश्चय ही नई पीढ़ी के लेखकों, कवियों, पत्रकारों और रचनाकारों को प्रेरित करेगा।

पुरवाई एवं प्रवासी टुडे जैसी पत्रिकाओं का दशकों तक संपादन करने और ब्रिटेन में उन्हें स्थापित करने के अपने अनुभव के आधार पर मैं भली-भाँति जानता हूँ कि किसी साहित्यिक पत्रिका का नियमित प्रकाशन केवल उत्साह से नहीं, बल्कि निरंतर समर्पण, धैर्य, आर्थिक चुनौतियों और अथक परिश्रम से संभव होता है। इसलिए मैं आपकी इस प्रतिबद्धता को हृदय से सलाम करता हूँ तथा ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि आने वाले वर्षों में पत्रिका के प्रकाशन-पथ पर आने वाले प्रत्येक संघर्ष और चुनौती पर आपको विजय प्राप्त हो। आपकी यह साहित्यिक यात्रा निरंतर सफल, सार्थक और प्रेरणादायी बनी रहे।

मैं कामना करता हूँ कि “नमस्ते भारत” विश्वभर के भारतीयों को जोड़ते हुए साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संवर्धन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाए तथा आने वाले वर्षों में एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच के रूप में स्थापित हो।

आपको तथा इस आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ एवं स्नेहाशीष।


सप्रेम एवं सादर,
डॉ. पद्मेश गुप्त
संस्थापक, यू.के. हिंदी समिति
पूर्व संपादक – पुरवाई एवं प्रवासी

Dear Ashish Mishra,

My heartfelt congratulations and best wishes to you on the launch of Namastey Bharat Magazine.

This is much more than the launch of a publication; it marks the beginning of a meaningful literary and cultural bridge connecting India and the United Kingdom through Hindi and English. In an age where thoughtful writing and meaningful dialogue are more important than ever, your initiative is both timely and commendable.

Your inspiring motto, “Write More, Grow More,” will undoubtedly encourage writers, poets, journalists and creative minds to express themselves with confidence and purpose.

Having spent decades editing Purvai and Pravasi Today, and establishing both magazines as respected literary publications in the United Kingdom, I understand first-hand the dedication, perseverance and resilience required to sustain a magazine over the years. The journey is filled with creative, organisational and financial challenges, and it demands unwavering commitment.

For that reason, I salute your vision and dedication. I sincerely pray that you are blessed with the strength, wisdom and determination to overcome every challenge that comes with publishing Namastey Bharat, and that the magazine continues to flourish for many years to come.

May Namastey Bharat become a respected international platform that connects communities across the world, nurtures literary talent, promotes cultural understanding, and strengthens the bonds between India and the global Indian diaspora.

My warmest wishes to you and to everyone associated with this wonderful initiative. May this be the beginning of a long, successful and inspiring journey.

With warm regards and blessings,

Dr Padmesh Gupta
Founder, UK Hindi Samiti
Former Editor, Purvai and Pravasi Today