लंदन की मेट्रो में बैठे आदम ने देखा कि एक बुज़ुर्ग यात्री खड़े हैं। उसने तुरंत अपनी सीट उन्हें दे दी।
बुज़ुर्ग मुस्कुराए और बोले, “धन्यवाद बेटा।”
आदम खिड़की से बाहर देखते हुए सोचने लगा कि बड़े शहरों की असली पहचान ऊँची इमारतें नहीं, बल्कि लोगों की छोटी-छोटी अच्छाइयाँ हैं।
शिक्षा: छोटे सद्भाव बड़े समाज को बेहतर बनाते हैं।