कविता: ये मोहब्बतें पुरानी-सी – विवेक दाधीच

letterbox के ज़माने की
ये मोहब्बतें पुरानी-सी
किसी ख़ुशबू वाली चिट्ठी-सी
किसी भीगी शाम सुहानी-सी

एक काँपते हाथ को थामता
दूसरा काँपता हाथ
दोनों काँपते हाथ
अब काँपते साथ साथ
और यूँ बटोर के भरोसा
चलते कदम बा कदम
एक slow, romantic
beautiful कहानी सी
letterbox के ज़माने की
ये मोहब्बतें पुरानी-सी

चमकते बाल, झूलते गाल
टिमटिमाती आँखें, आँखों मे सवाल
जैसे की तू कौन, तो कभी मैं कौन
कभी बोलते ही चले जाना
कभी गुम,  कभी मौन
पर जो पहचान एक-दूजे को मुस्कुराते हैं
तो आशिक़ है हर दादाजी
हर दादी दीवानी-सी
letterbox के ज़माने की
ये मोहब्बतें पुरानी-सी

कवि: विवेक दाधीच, ब्रिटेन

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