गाएगा युग – हाइकु संग्रह – कश्मीरी लाल चावला
हाइकु जापान की विश्वप्रसिद्ध काव्य विधा है, जिसमें 5–7–5 वर्णों की तीन पंक्तियों में कुल 17 वर्ण होते हैं। यह विश्व की सबसे छोटी लेकिन सबसे प्रभावशाली विधा है, जो जीवन के गहरे अनुभवों को संक्षेप में प्रकट करती है। आज यह विधा भारत में भी लोकप्रिय है, और हिंदी, पंजाबी, अंग्रेज़ी सहित अनेक भाषाओं में साहित्यकार इस लघु विधा में लेखन कर गर्व अनुभव कर रहे हैं।
पंजाब की पवित्र भूमि मुक्तसर से संबंध रखने वाले लेखक श्री कश्मीरी लाल चावला हाइकु विधा के समर्पित साधक हैं। वे 1995 से निरंतर हिंदी, पंजाबी और अंग्रेज़ी में हाइकु रच रहे हैं। उन्होंने न केवल स्वयं लेखन किया बल्कि अन्य हाइकुकारों की पुस्तकों को देशभर की लाइब्रेरियों तक पहुँचाकर इस विधा को प्रतिष्ठा दिलाने का कार्य किया। उनका नवीन हाइकु संग्रह “गाएगा युग” (2025) भारतीय जीवन, प्रकृति, समाज और मानवीय संबंधों का सूक्ष्म चित्रण प्रस्तुत करता है। इस पुस्तक में प्रेम, रिश्तों की दूरियाँ, नारी जीवन की पीड़ा, ऋतुओं की छटा, और प्रकृति के संगीत की गूँज मिलती है।
कुछ प्रतिनिधि हाइकु —
* सर्दी के बीच
रजाई ओढ़ रहे
घर सदस्य
* बेटी के साथ
हर घर रोशन
जलते दीप
* समय साथ
अब रिश्तों के बीच
फासले बढ़े

इन पंक्तियों में जीवन की संवेदना और समय की विडंबना दोनों झलकती हैं। कश्मीरी लाल चावला का विश्वास है कि “हर युग गाएगा,” क्योंकि जीवन स्वयं एक गीत है। उनकी रचनाओं में प्रकृति और मनुष्य का गहरा तादात्म्य दिखाई देता है। वर्षा की किनमिन ध्वनि, भौंरों की गुनगुनाहट, तितलियों की उड़ान, और पतझड़ की उदासी — ये सब उनके हाइकु में संगीत बनकर गूँजते हैं।
“गाएगा युग” केवल एक हाइकु संग्रह नहीं, बल्कि समय, संवेदना और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज़ है। कश्मीरी लाल चावला ने हाइकु को भारतीयता का रंग देकर उसे नई पहचान दी है।
आदरणीय साहित्यकारों, विद्वान अतिथियों और मित्रों, आज हम सब यहाँ एक ऐसे सृजनधर्मी कवि का स्वागत करने के लिए एकत्र हुए हैं, जिसने जापानी काव्य विधा हाइकु को भारतीय मिट्टी की सुगंध से सराबोर किया है – वे हैं कश्मीरी लाल चावला। हाइकु, जैसा कि हम जानते हैं, 5–7–5 वर्णों में जीवन की पूरी कहानी कह देता है। यह दुनिया की सबसे छोटी, किंतु सबसे गहन काव्य विधा है।
श्री कश्मीरी लाल चावला 1995 से हिंदी, पंजाबी और अंग्रेज़ी — तीनों भाषाओं में हाइकु लिखते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं के साथ-साथ अन्य कवियों की पुस्तकों को कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की लाइब्रेरियों तक पहुँचाकर इस विधा को लोकप्रिय बनाया।
उनका नवीन हाइकु संग्रह “गाएगा युग” प्रकृति, प्रेम, परिवार, और समाज — सभी को एक ही सूत्र में बाँधता है। उनके हाइकु जीवन की गहराइयों को छूते हैं —
* “सर्दी के बीच, रजाई ओढ़ रहे, घर सदस्य।”
“बेटी के साथ, हर घर रोशन, जलते दीप।”
इन पंक्तियों में सादगी है, पर संवेदना अथाह है।
कश्मीरी लाल चावला कहते हैं – * “हर युग गाएगा, क्योंकि जीवन स्वयं एक गीत है।”
उनकी कविताएँ हमें यह संदेश देती हैं कि प्रकृति, मनुष्य और समय — तीनों के बीच एक अविभाज्य संबंध है।
“गाएगा युग” वास्तव में भारतीय संवेदना का गीत है, जो शब्दों की सीमाओं को पार करके हमारे हृदय में गूँजता है। मैं श्री कश्मीरी लाल चावला जी को इस उत्कृष्ट सृजन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ और आशा करता हूँ कि यह युग सचमुच गाएगा — उनके शब्दों की लय में, उनकी संवेदना की गहराई में।
धन्यवाद।
डॉ नैब सिंह मंडेर
लेखक/चिंतक/साहित्य आलोचक
मंडेर कॉम्प्लेक्स, मेन बाजार , रतिया -125051(हरियाणा), 8168455601