संग तुम्हारे ख़्वाब सजे थे, साथ तुम्हारे जाना था
फिर क्यों साथी बीच राह में हमे छोड़ कर चले गए
अभी-अभी तो हम मिले थे
कितनी बाते करनी थी
मेरे अधरों की मुस्काने
तेरे अधरों पर सजनी थी
ऐसा भी क्या रूठे यारा, मुख मोड़ कर चले गए।
संग तुम्हारे ख़्वाब सजे थे, साथ तुम्हारे जाना था।।
अभी तो जी भर देखा न था
हृदय हमारे मिलने थे
अभी हमारा मिलन अधूरा
उसमें सब रंग भरने थे
कितने थे अरमान हमारे, उन्हें तोड़ कर चले गए।
संग तुम्हारे ख़्वाब सजे थे, साथ तुम्हारे जाना था।।
मेरे दिल के साज तुम्ही थे
मन की मेरी आस तुम्ही थे
तुम बिन जीना कैसा मेरा
मेरा तो विश्वास तुम्ही थे
तुमसे ही था जीवन मेरा, मुझे छोड़कर चले गए।
संग तुम्हारे ख़्वाब सजे थे, साथ तुम्हारे जाना था।।

आकांक्षा द्विवेदी