6 July 2026 | सोमवार | आषाढ़ | सप्तमी | विक्रम संवत 2083

ब्रिटेन में गर्मियों का मौसम

ब्रिटेन में औसत गर्मियों का तापमान 22 – 25 डिग्री रहता है लेकिन कुछ सप्ताह ऐसे भी होते हैं जब यह बढ़कर 30 – 32 के आसपास होता है। हालाँकि की पिछले कुछ वर्षों कुछ अपवाद भी हुएँ हैं जैसे दो साल पहले एक दिन पारा 40 डिग्री को छू गया। इसका मतलब हाहाकार से कम नहीं क्यूँकी यहाँ भारत की तरह ना तो आम तौर पर घरों में सीलिंग फैन लगे होते हैं ना ही कूलर – एसी। 

लेकिन चाहे पारा 22 – 25 भी हो सूर्य किरणें बहुत तीव्र होती हैं, अल्ट्रा-वॉइलेट किरणें काफ़ी होती हैं हमारी त्वचा के पिगमेंट्स को दूषित करने के लिए – इसीलिए यहाँ के लोग हल्की-सी धूप में भी सनस्क्रीम आदि का उपयोग करना पसंद करते हैं। धूप बहुत ही तेज और तीक्ष्ण हो जाती है।

जहाँ पूरे साल औसतन बारिश होती है लेकिन अगर गर्मियों में कुछ हफ़्तों के लिए नहीं हुई तो यहाँ के हरे मैदान झुलस मैदान जाते हैं, जल-स्रोत सुख जाते हैं कई जगह घोषित कर दिया जाता है, कई बार सरकार लोगों को कम से कम पानी उपयोग करने की सलाह देती है जैसे कार या अपने ड्राइव वेज़ को ना धोना। 

ब्रिटिश कवि डेरेक वॉलकोट की एक कविता मिड समर का हिन्दी अनुवाद इसी बात को सुंदर रूप से समझाता है:

सफ़ेद गर्मी,

एक हरी नदी।

एक पुल,

झुलसी हुई पीली पत्तियाँ।

जैसे गर्मियों में सोने वाले घर,

अगस्त में डूब चुके हैं।

मानों जो दिन मैंने सहेजे थे,

वे खोते जा रहे हैं।

मेरे हाथों में दिन 

ऐसे बड़े हो जाते हैं 

जैसे बेटियाँ।

यहाँ के विद्यालयों में मध्य जुलाई से अगस्त के अंत तक छुट्टियाँ होती हैं। मतलब कि लोग पूरे साल इन दिनों में पूरे परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने, घूमने-फिरने के लिए महीनों पहले से प्लान कर चुके होते हैं। लोग या तो ब्रिटेन में किसी सागर किनारे सुंदर रेतीले बीच पर होना पसंद करते हैं साउथ वेस्ट इंग्लैंड – कॉर्नवाल, या किसी पहाड़ी झीलों भरा स्थान जैसे लेक डिस्ट्रिक्ट, स्कॉटलैंड या किसी नज़दीकी यूरोपीय देशों में। 

बहुत से हम भारतीय परिवार अपने मूल देश की गर्मी और लू का आनंद उठाने निकल पड़ते हैं। परंतु भारत की मिट्टी की सुगंध, लोगों का अपनत्व, परिवारों का मिलन और आम का स्वाद उन्हें वहाँ गर्मी की चिलचिलाहट को भुला देता है।

आम से याद आया – हमारे ब्रिटेन में भी मई से आम आने शुरू हो जाते हैं। मूलतः ये भारत आदि से आयात किए जाते हैं – थोड़े महँगे मिलेंगे जैसे औसतन बीस पाउंड के आठ या दस लेकिन केसर, बदामी, अलफाँसो के स्वाद के आगे सस्ते ही लगेंगे।

ब्रिटेन की गर्मियों के मौसम में एक और सुंदर बात होती है – बहुत से लोग इस मौसम में अपने माता – पिता को भारत से बुलाते हैं। यह मौसम उनकी सेहत के लिए सबसे उपयुक्त होता है। कई बार मॉल में, बाज़ार में, ट्रेन स्टेशन पर या किसी किसी पर्यटन स्थल पर आपको हमारे आदरणीय और पूज्य जोड़े बहुतायत किसी साड़ी – कुर्ते में लिपटे मिल जाएँगे। 

ब्रिटेन में यूँ तो इस मौसम में कई मेले या उत्सव भी आयोजित किए  जाते हैं जैसे ग्लास्टोंनबरि में कलाकारों का जमावड़ा, एडिंगबर्ग का सांस्कृतिक उत्सव आदि लेकिन जो एक इवेंट विश्वभर में प्रसिद्ध भी है और सम्मानित भी वो है विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट। ये लंदन में सन् 1877 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। लगभग दो सप्ताह चलने वाला खेलों का लोकप्रियतम टूर्नामेंट जून – जुलाई में होता है। इसे देखने आये दर्शक स्ट्रिक्ट ड्रेस कोड वाले परिधान में होते हैं जो प्रायः पूरी दुपहरिया पिम्स एक जिन और फलों से लदी ड्रिंक, स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम का लुत्फ़ उठाते निकाल देते हैं। 

यहाँ तक कि कंपनियाँ प्रायः समर पार्टी, टैरेस पार्टी आयोजित करती हैं, या कुछ नहीं तो ड्रिंक्स आदि। यहाँ वैसे तो बार आदि में जाना आम है लेकिन गर्मियों में बियर बार भरे मिलेंगे – आपको लंदन में कई ऐसे बार मिलेंगे जिसके बाहर तक लोगों का जमघट होगा – सभी के  हाथों में लम्बा बियर का ग्लास या कोई अन्य ड्रिंक।

एक और रोचक चलन है – स्ट्रीट पार्टी – किसी सड़क पर वहाँ उस गली में रह रहे निवासियों द्वारा की जाती है। पूरी गली बंद कर दी जाती है – मेज़पोशो से सुसज्जित टेबल, कुर्सी, केक, कुछ पेय या पड़ोसियों का पॉटलॉक मतलब घर के बने खाने की साझेदारी। पूरा एक साथ संगीत की धुन पर आनंद उठाता है। मूलतः ऐसी स्ट्रीट पार्टी की परम्परा 1919 से चली आ रही है जब प्रथम विश्वयुद्ध के शांति समझौतों के बाद एक जश्न के रूप में मनाया गया। गलियों के लैंपपोस्टों पर लगाई गई बंटिंग, रंगीली झण्डियाँ हमेशा सुस्त पड़े पड़ोस को ऊर्जावान और जीवंत बना देती हैं। स्ट्रीट पार्टी अब अन्य अवसरों पर भी आयोजित होने लगी है जैसे कोई रॉयल सेलिब्रेशन – पिछले दिनों हुए किंग चार्ल्स के राज्याभिषेक के दिन पूरे इंग्लैंड में ऐसी सड़क छाप पार्टियाँ हुईं। एक तरह से ये पुराने दिनों में कैसे लोग पड़ोस में एक साथ मिलकर रहते थे उसे पुनः दोहराती हैं जो आज की भागमभाग वाली ज़िंदगी में विलुप्त होती जा रही हैं।

ब्रिटिश समर की बात ब्रिटिश समर टाइम की चर्चा किए बग़ैर पूरी नहीं होती। पुराने ज़माने में रेलवेज़ को फिर आम कार्यालयों में गर्मी और ठंड दोनों में सूर्य के प्रकाश कि अधिकतम उपयोग करने के उद्देश्य से अलग –  अलग टाइम सेटिंग्स बनाई गई। ब्रिटिश समर टाइम का अर्थ है एक घंटा सुई पीछे कर देना मतलब मार्च के अंतिम रविवार को रात में 1 – 2 AM होते ही एक बार फिर 1 पर कर दिया जाता है। जिससे सूरज की रोशनी दिन के समय एक घंटा और मिले। यही कहानी उल्टी कर दी जाती है अक्तूबर के अंतिम रविवार को ताकि ठंड में जब सूरज का प्रकाश कम समय के लिए होता है तब उसका भरपूर उपयोग किया जा सके – थोड़ा कन्फ्यूज़िंग है न – आम-तौर पर प्रायः ऐसा होता है। 

हम तो सीधा ये जानते हैं कि सर्दियों में भारतीय समय और ब्रिटिश समय में साढ़े पाँच घंटे का अंतर होता है और गर्मियों में साढ़े चार घंटे का। रुचिकर ये भी है कि स्कॉटलैंड आदि में उजाला सुबह साढ़े तीन बजे से होने लगता है। डिनर के समय धूप खिली हो तो कैसा लगेगा – जी यहाँ गर्मियों में साथ-आठ सप्ताह लगभग दस बजे रात तक उजाला ही होता है।

कुल मिलाकर अगर कहीं स्ट्रॉबेरी, चेरी के खेत दिखें, फ्लॉवर शोज़ फूलों की प्रदर्शनी दिखे, विम्बलडन का खेल चल रहा हो या समुद्री बीच पर ज़िन्दगी का आनंद उठाते लोग तो समझ जाना यह हरा-भरा देश ब्रिटेन है – जिसे यहाँ के लोग इतराकर ”ग्रेट ब्रिटिश वेदर“ की संज्ञा देते हैं।

Leave a Comment